एल. एन. आई. पी. ई. के बारे में
ऐतिहासिक विकास (Historical Development)
 

लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा विश्वविद्यालय, ग्वालियर की स्थापना लक्ष्मीबाई शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय (Lakshmibai College of Physical Education - LCPE) के रूप में भारत सरकार के शिक्षा एवं संस्कृति मंत्रालय द्वारा अगस्त 1957 में ग्वालियर में की गई, जहाँ इस युद्ध की महान नेत्री झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में अपना बलिदान दिया था।

  इस संस्थान का प्रारंभ विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से सम्बद्ध महाविद्यालय के रूप में हुआ तथा 1964 में यह जीवाजी विश्वविद्यालय के अन्तर्गत आ गया। 1973 में इस संस्थान के राष्ट्रीय महत्व को दृष्टिगत रखते हुए इसका नामकरण लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय (Lakshmibai National College of Physical Eucation-LNCPE) के रूप में हुआ। इस संस्थान के विशिष्ट स्तर, प्रकृति तथा सुविधाओं एवं विकास को दृष्टिगत रखते हुए 1982 में इसे जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के तहत ‘स्वायत्तशासी महाविद्यालय‘ (Autonomous College) का स्तर प्रदान किया गया।
     
  इस संस्थान के द्वारा शारीरिक शिक्षा, खेल एवं शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट शैक्षणिक सेवाओं को मान्यता प्रदान करते हुए भारत सरकार, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा ​िसतम्बर 1995 में इसे यू.जी.सी. अधिनियम 1956 की धारा 3 के तहत उद्घोषणा F.. .9-14/92-U.3 दिनांक 21 सितम्बर 1995 के द्वारा सम विश्वविद्यालय  (Deemed to be University) का दर्जा प्रदान किया गया। इस प्रकार संस्थान का पुन: नामकरण लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (Lakshmibai National Instituteof Physical Education - LNIPE) के रूप में किया गया। यह भारत में शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में एकमात्र सम विश्वविद्यालय स्तर प्राप्त संस्थान है तथा इसे दक्षिण् एशिया इस प्रकार के संस्थान के रूप में विशिष्ट स्थान प्राप्त है।
     
  सन् 2000 में यह संस्थान युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासकीय क्षेत्राधिकार के तहत आ गया। यह मंत्रालय के द्वारा योजना एवं गैर योजना व्यय करने के लिये पूर्णरूपेण वित्त पोषित है।
     
  विश्वविद्यालय के उद्देश्य (Objectives of the University)
    विश्वविद्यालय के उद्देश्य निम्न प्रकार से हैं :
      शारीरिक शिक्षा एवं खेल के क्षेत्र में उच्च अर्हता प्राप्त शिक्षक व नेतृत्वकर्ता तैयार करना।

शारीरिक शिक्षा एवं खेल के क्षेत्र में उत्कृष्टता व अन्वेषण के केन्द्र के रूप में कार्य करना।

शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में  कार्यरत अन्य संस्थाओं को व्यवसायिक व शैक्षणिक नेतृत्व प्रदान करना।

इस क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों को व्यावसायिक मार्गदर्शन व रोजगार के अवसर प्रदान करना।

शारीरिक शिक्षा व खेल में सामूहिक सहभागिता को बढ़ावा देना।

देश में शारीरिक शिक्षा व खेल कार्यक्रमों का विकास व उसका प्रसार करना।

शारीरिक शिक्षा व खेल के क्षेत्र में समकालीन वैज्ञानिक साहित्य का निर्माण करना व उसको प्रोत्साहित करना।

शारीरिक शिक्षा एवं खेल के क्षेत्र में सामुदायिक सेवायें प्रदान करना।
शैक्षणिक कार्यक्रम का प्रारम्भ (Commencement of Academic Programmes)
  इस संस्थान की स्थापना का मुख्य उद्देश्य देश में शारीरिक शिक्षा के स्तर को उन्नत कर स्नातक तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के माध्यम से गुणवत्ता वाले शिक्षक तथा नेतृत्व तैयार करना था। 1957 में त्रिवर्षीय शारीरिक शिक्षा में स्नातक (Bachelor of  Physical Education - B.P.E.) पाठ्यक्रम तथा 1963 में दो वर्षीय शारीरिक शिक्षा में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (Master of Physical Education - M.P.E.) प्रारंभ किया गया। 1980 में इस संस्थान ने एक और मील का पत्थर पार कर शारीरिक शिक्षा में एक वर्षीय मास्टर ऑफ फिलॉस्फी (Master of Philosophy - M.Phil.) पाठ्यक्रम  प्रारंभ करने वाला देश का प्रथम संस्थान होने का गौरव प्राप्त किया। शारीरिक शिक्षा में पी.एच.डी. (Doctor of Philosophy in Physical Education - Ph.D.) 1998 में प्रारम्भ किया गया। संस्थान शारीरिक शिक्षा एवं खेल के विविध विषयों में विभिन्न प्रकार के पाठ्यक्रमों/डिप्लोमा/स्नात्तकोत्तर पत्रोपाधि कार्यक्रमों मे भी विद्यार्थियों को प्रवेश देता है।
     
  प्रारंभ में शारीरिक शिक्षा का स्नातक पाठ्यक्रम (Bachelor of Physical Education - B.P.E.) तीन वर्ष का था। इस पाठ्यक्रम को अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के समरूप लाने के लिए इस पाठ्यक्रम की अवधि जुलाई 2003 से चार वर्ष कर दी गई तथा पाठ्यक्रम का नाम बैचलर ऑफ फिजीकल एज्यूकेशन (Bachelor of Physical Education - B.P.Ed.) इंटीग्रेटेड कर दिया गया। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद्, पश्चिम क्षेत्रीय केन्द्र, भोपाल द्वारा अपने आदेश क्रमांक डब्ल्यू.आर.सी./5-6/90/2006/सी-5370 दिनांक 26 दिसम्बर 2006 द्वारा इस पाठ्यक्रम को मान्यता दी गई है। दो वर्षीय एम.पी.एड. पाठ्यक्रम को भी राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद, भोपाल द्वारा अपने आदेश क्र आदेश क्रमांक डब्ल्यू.आर.सी./2-32/ए.पी.डब्ल्यू.ओ. 1960/214009/77/2005/7426 दिनांक 16.9.2005 के अन्तर्गत मान्यता दी गई है।
     
  स्पोट्‍र्स कोचिंग में पी.जी.डी. की मान्यता के लिये क्लिक करें
     
  डिजिटलाइज्ड सेल्फ अप्रेजल रिपोर्ट (एन.सी.टी.ई.) 2010-2011 के लिये क्लिक करें
विभाग एवं पाठ्यक्रम (Departments and Programmes)
    विश्वविद्यालय के प्रबंधन मण्डल ने 18 जनवरी 2011 को सम्पन्न अपनी 47वीं बैठक में विभागों का पुर्नगठन किया। विभाग से संबंधित जानकारी के लिये क्लिक करें
     
संस्थान की समीक्षा (Review of the Institute)
    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने अपने द्वारा विधिवत् गठित समिति के माध्यम से 13 एवं 14 अक्टूबर 2009 को संस्थान की समीक्षा की। संस्थान का परीक्षण भारत सरकार के द्वारा भी 2009 में किया गया एवं संबंधित टिप्पणियों पर औपचारिक कार्यवाही प्रतिवेदन (Action Taken Report) यू.जी.सी. को भेजा गया।
     
एन.ए.ए.सी. प्रत्यायन (NAAC Accreditation)
    संस्थान को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद् (National Assessment and Accreditation Council -NAAC) द्वारा इसकी पीयर समिति के माध्यम से परीक्षण किया गया तथा इस परीक्षण के आधार पर संस्थान को दिनांक 28 मार्च 2010 को सम्बद्धता/मान्यता प्रदान की गई, जोकि 5 वर्ष के लिये वैध है।
आई.एस.ओ. प्रमाणीकरण (ISO Certification)
    संस्थान को मैसर्स यूकास क्वालिटी मैनेजमेंट द्वारा आई.एस.ओ. 9001:2008 के मापदण्डों पर 14 अगस्त 2009 को प्रमाणित किया गया, जो कि 3 वर्ष हेतु वैध है।
एल.एन.यू.पी.ई. - उच्चतर शिक्षा सर्वेक्षण (higher Education Survey) के लिये क्लिक करें
     
संचालन पद्धति (Governance System)
  लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा विश्वविद्यालय, ग्वालियर मध्यप्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1973े तहत पंजीकृत सोसाइटी है। तद्नुसार संस्थान मेमोरेण्डम ऑफ एसोशिएशन के तहत शासित है।
संस्थान के प्राधिकारी (Authorities of the Institute)
  सभापति (President)
    केन्द्रीय मंत्री, युवा कार्यक्रम एवं खेल अपने इस पद के तहत संस्थान के सभापति होते हैं तथा दीक्षांत समारोह में उप​िस्थत होने की दशा में इसकी अध्यक्षता करते हैं।
  प्रबंधक मण्डल (Board of Management)
    प्रबंधक मण्डल संस्थान के प्रबंधन का मुख्य अंग है तथा इसका मुख्य कार्यकारी निकाय है। सचिव, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार प्रबन्धक मण्डल के पदेन सभापति एवं कुलसचिव पदेन सचिव होते है। प्रबंधक मण्डल की संरचना हेतु क्लिक करें।
  विद्वत परिषद (Academic council)
   

विद्वत परिषद संस्थान का प्रमुख शैक्षणिक निकाय है तथा शिक्षा की गुणवत्ता को बनाये रखने, प्रशिक्षण, अन्तरविभागीय समन्वय, शोध, परीक्षाएँ एवं जांच हेतु उत्तरदायी है। कुलपति इसके पदेन सभापति एवं कुलसचिव पदेन सचिव होते हैं।

विद्वत परिषद की संरचना हेतु क्लिक करें।

  वित्त समिति (Finance Committee)
    वित्त समिति संस्थान के वार्षिक खातों व वित्तीय अनुमान का लेखा-जोखा रखती है। यह वार्षिक बजट एवं संशोधित अनुमानों पर भी विचार करती है। कुलपति इस समिति के पदेन सभापति एवं वित्त अधिकारी पदेन सचिव होते हैं।

समिति की संरचना के लिये क्लिक करें।

  नियोजन एवं निगरानी मण्डल (Planning & Monitoring Board)
    नियोजन एवं निगरानी बोर्ड संस्थान का मुख्य नियोजन निकाय है और संस्थान  के विकास कायों‍र् की निगरानी के लिये उत्तरदायी है। कुलपति मण्डल के सभापति और कुलसचिव इसके सचिव होते हैं।
  बोर्ड ऑफ स्टडीज (Board of Studies)
    संस्थान के प्रत्येक विभाग के लिये एक बोर्ड ऑफ स्टडीज है जो एक शैक्षणिक सत्र में कम से कम दो से तीन बार आयोजित होती है जहाँ विचारपूर्वक विभागीय पाठ्यक्रम, परीक्षा योजनाएँ, प्रश्न-पत्र बनाने और मूल्यांकन आदि की समीक्षा पर चर्चा होती है और प्रबंधन मण्डल के अनुमोदन से पहले विद्वत परिषद की बैठक में विस्तार से चर्चा की जाती है।
  संस्थान के अधिकारी (Officers of the Institute)
    कुलपति (Vice-Chancellor)
कुलपति संस्थान के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी होते हैं एवं संस्थान के विषयों पर सामान्य पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण रखते हैं। वे संस्थान के सभी प्राधिकारियों के निर्णयों के कार्यान्वयन के लिये उत्तरदायी होते हैं। वे संस्थान के प्रबंधन मण्डल के सदस्य तथा विद्वत परिषद्, वित्त समिति, नियोजन एवं निगरानी मण्डल और चयन समिति के पदेन सभापति होते है। इन्हें सोसायटी के अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाता है और पांच साल की अवधि के लिये वे पद धारण करते हैं।

विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति के लिये क्लिक करें

विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति के लिये  क्लिक करें

  कुलसचिव (Registrar)
    कुलसचिव संस्थान के पूर्णकालिक वेतनभोगी अधिकारी होते हैं और वे सीधे कुलपति के प्रति उत्तरदायी होते हैं। वे प्रबंधन मण्डल, विद्वत परिषद्, नियोजन एवं निगरानी मण्डल के पदेन सचिव होते हैं। इन्हें प्रबंधन मण्डल द्वारा चयन समिति की अनुशंसा पर नियुक्त किया जाता है।
  वित्त अधि्कारी (Finance Officer)
    वित्त अधिकारी संस्थान के पूर्णकालिक वेतनभोगी अधिकारी होते हैं और वे प्रबन्धक मण्डल द्वारा नियुक्त किये जाते हैं। वे कुलपति के दिशा-निर्दश पर कार्य करते हैं और वार्षिक बजट के अनुमानों को वित्त समिति और प्रबन्धक मण्डल की बैठक में प्रस्तुत करने की तैयारी के लिये जिम्मेदार होते है। वे प्रबन्धक मण्डल के नियंत्रण के तहत संस्थान के धन एवं निवेश के प्रबंधन के लिये भी जिम्मेदार होते हैं। वे वित्त समिति के पदेन सचिव होते हैं।
  परीक्षा नियंत्रक (Controller of Examination)
    परीक्षा नियंत्रक परीक्षा और मूल्यांकन के विषय पर प्रबन्धन मण्डल, विद्वत परिषद् और कुलपति के दिशा-निर्देश के कार्यान्वयन के लिये उत्तरदायी होते हैं।
  विभागाध्यक्ष (Head of the Department)
    संस्थान में प्रत्येक विभाग के लिये एक विभागाध्यक्ष होते है, और इन्हें कुलपति के द्वारा नियुक्त किया जाता है। वे अपने विभाग की बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं।
  अन्य अधिकारी (Other Officers)
    सहायक और उप कुलसचिव विभिन्न अनुभागों के कार्यात्मक प्रमुख होते है जैसे, प्रशासन, शैक्षणिक, सम्पत्ति, खरीद आदि जो संस्थान के सुचारू कार्य संचालन में कुलसचिव की सहायता करते हैं।
परिसर (Campus)
    लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा विश्वविद्यालय के परिसर को शक्तिनगर के नाम से जाना जाता है जो कि रेसकोर्स रोड पर ​िस्थत है तथा ग्वालियर रेल्वे स्टेशन से लगभग 1 कि.मी. की दूरी पर ​िस्थत है। ग्वालियर शहर आगरा-मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग पर नई दिल्ली से करीब 320 कि.मी. की दूरी पर मुख्य उत्तर-दक्षिण रेलमार्ग पर ​िस्थत है। संस्थान परिसर का सम्पूर्ण क्षेत्रफल 153 एकड़ है एवं यह पूर्णत: आवासीय है। परिसर में आवासीय भवन सहित मुख्य भवन, अध्यापन  कक्ष, पुस्तकालय भवन, प्रयोगशाला भवन, शोध खण्ड, सभागार व प्रशासनिक खण्ड भी है।
डॉ. पी.एम. जोसेफ केन्द्रीय पुस्तकालय (Dr. P.M. Joseph Central Library)
   

संस्थान के डॉ. पी.एम. जोसेफ केन्द्रीय पुस्तकालय में पर्याप्त मात्रा में व्यावसायिक पुस्तकें व साहित्य उपलब्ध है। साथ ही, यहां व्यावसायिक व शोध जर्नल/पुस्तकें व आवधिक पत्रिकायें नियमित रूप से मंगाई जाती है। यह भारतवर्ष का अपने प्रकार का सर्वश्रेष्ठ पुस्तकालय है। संस्थान की प्रयोगशालायें अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित है जो कि शोधार्थियों की समस्त शैक्षणिक आवश्यकताओं की पूर्ति करती है।

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यू.जी.सी. अकादमिक स्टॉफ कॉलेज (UGC Academic Staff College)
   

अकादमिक स्टॉफ कॉलेज की स्थापना फरवरी 2000 में की गई और यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा वित्त पोषित है। यह भारत के सबसे अच्छे ए.एस.सी. के रूप में जाना जाता है। इस कॉलेज के उद्देश्यों में नये प्रवेशी शिक्षण स्टॉफ (सहायक प्रोफेसर स्तर) के लिये 28 दिनों का उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन, सेवाकालीन शिक्षकों के लिये 21 दिन का रिफ्रेशर कोर्स का आयोजन, अल्पकालिक पाठ्यक्रम, सेमीनार, कार्यशालाओं का आयोजन करना शामिल है। रिफ्रेशर और ओरिएन्टेशन कार्यक्रम कैरियर के विकास लिये अनिवार्य है। वर्ष 2010-11 में ए.एस.सी. में रिफ्रेशर पाठ्यक्रम-04, ओरिएन्टेशन पाठ्यक्रम-02 सम्पन्न हुए।

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ऑफ-कैम्पस (Off-Campus)
    संस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2009-10 में अपना उत्तर-पूर्वी क्षेत्रीय केन्द्र गुवाहाटी (असम) में भारत सरकार क अनुमोदन पत्र क्रमांक 2-10/2009-आईडी दिनांक 20.08.2009 के तहत स्थापित किया गया। विश्वविद्यालय ने असम सरकार के साथ दिनांक 14.05.2010 को क्षेत्रीय केन्द्र की स्थापना हेतु एक समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) पर हस्ताक्षर किये। असम सरकार के द्वारा शैक्षणिक सत्र 2008-09 में शैक्षणिक कार्यक्रम आरम्भ करने के लिये 284679.17 स्क्वा. फी. भूमि और उस पर बनी बुनायादी सुविधाएँ तेपा​िसया खेल परिसर, सोनापुर, गुवाहाटी में प्रदान की गई।
पायका रिसोर्स सेन्टर (PYKKA Resource Centre - PRC)
    राष्ट्रीय खेल नीति 2001 ‘ग्रास रूट’ स्तर पर खेल गतिविधियों एवं राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिये खेलों को व्यापक बनाने पर विशेष बल देता है। पंचायत युवा क्रीड़ा और खेल अभियान (PYKKA) पंचायत स्तर पर मूलभूत खेल सुविधाओं एवं उपकरणों को प्रदान कर तथा साथ ही ब्लॉक, जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर वार्षिक स्पर्धाओं के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देकर उपयुक्त उद्देश्यों को पूरा करने का प्रयास करता है। पायका रिसोर्स केन्द्र के उद्देश्य निम्न प्रकार से हैं -
      मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण
राज्यों व केन्द्र शा​िसत प्रदेशों में खेल सुविधाओं के सृजन हेतु मॉडल प्रस्तुत करना।
राष्ट्रीय मास्टर ट्रेनर का रखरखाव
राष्ट्रों के साथ विशेषज्ञोें का आदान-प्रदान
मास्टर ट्रेनर के लिये रिफ्रेशर पाठ्यक्रम
 
    पायका रिसोर्स सेन्टर (PRC) एल.एन.यू.पी.ई. ग्वालियर में ​िस्थत है जो शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण की गतिविधियों का केन्द्र है जहाँ से तकनीकी विवरण का निर्माण एवं आपूर्ति संबंधित एजें​िसयों को इसे प्रचार-प्रसार के लिये की जाती हैं। पी.आर.सी. प्रशिक्षण केन्द्र है जहाँ राज्यों एवं केन्द्रशा​िसत प्रदेशों के विभिन्न हिस्सों से प्रायोजित मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण पायका की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये दिया जाता है।
    पी.आर.सी की ट्रेनिंग के लिये क्लिक करें