लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान- एक झलक

Arrow 1. ऐतिहासिक विकास

1.1 लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान, ग्वालियर की स्थापना लक्ष्मीबाई शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय (एल.सी.पी.ई.) के रूप में भारत सरकार के शिक्षा एवं संस्कृति मंत्रालय द्वारा अगस्त 1957 में स्वतंत्रता संग्राम के सौंवे वर्ष के दौरान ग्वालियर में की गई, जहाँ इस युद्ध की बहादुर वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीेबाई ने प्रथम स्वा धीनता संग्राम 1857 में अपना बलिदान दिया था।

1.2 इस संस्थान की शुरुआत विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से सम्बद्ध महाविद्यालय के रूप में हुई, तत्पश्चात् वर्ष 1964 में यह जीवाजी विश्वविद्यालय के अंतर्गत आ गया। संस्थान को राष्ट्रीय महत्व को दर्जा देते हुए वर्ष 1973 में इसका नाम बदलकर लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय (एल.एन.सी.पी.ई.) किया गया। इस संस्थान के विशिष्ट स्तर एवं प्रतिष्ठा को मान्यता प्रदान करने एवं इसके आगे के विकास के लिए वर्ष 1982 में इसे जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के ‘स्वाइयत्त्शासी महाविद्यालय’ का दर्जा प्रदान किया गया।

1.3 इस संस्थान के द्वारा शारीरिक शिक्षा, खेल एवं शोध के क्षेत्रों की सेवाओं को मान्यता प्रदान करते हुए भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा सितम्बर 1955 में वि.अ.आ. 1956 की धारा 3 के तहत इसे “सम विश्वविद्यालय” का दर्जा दिया गया। इस प्रकार संस्थान का नाम पुनः बदलकर लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (ल.रा.शा.शि.सं) किया गया। संस्थान भारत में शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में एकमात्र सम विश्वविद्यालय है तथा दक्षिण पूर्व एशिया में इसे विशिष्ट स्थान प्राप्त है।

1.4 इस संस्था न की स्थायपना का मुख्यप उद्वेश्यइ देश में स्नाकतक तथा स्ना4तकोत्त‍र पाठ्यक्रमों के माध्य‍म से योग्य शिक्षक तथा नेतृत्वा उत्प4न्नो कर शारीरिक शिक्षा के स्त्र को उन्नयत करना था। वर्ष 1957 में पहली बार देश में शारीरिक शिक्षा में स्नातक का त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम तथा वर्ष 1963 में शारीरिक शिक्षा में स्नातकोत्तर का द्विवर्षीय पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया। संस्थान द्वारा एकवर्षीय एम.फिल पाठ्यक्रम वर्ष 1980 में प्रारंभ कर एक और उपलब्धि हासिल की और साथ ही इस पाठ्यक्रम को प्रारंभ करने वाले भारत के प्रथम संस्थान होने का गौरव भी प्राप्त किया। संस्थान नियमित एम.फिल.- पीएच.डी. समन्वित पाठ्यक्रम एवं पीएच.डी पाठ्यक्रम में छात्रों को प्रवेश देता है। संस्थान शारीरिक शिक्षा एवं खेल के विविध विषयों में विभिन्न प्रकार के सर्टिफिकेट/ डिप्लोमा/ स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम में भी विद्यार्थियों को प्रवेश देता है।

1.5 शुरूआत में शारीरिक शिक्षा में स्नातक पाठ्यक्रम (बी.पी.ई.) की अवधि तीन वर्ष थी। पाठ्यक्रम को अन्य व्यावसायिक उपाधियों के समरूप लाने एवं इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए इसकी अवधि चार वर्ष कर इसका नाम बदलकर बैचलर ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन (इंटीग्रेटेड) किया गया। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एन.सी.टी.ई.) द्वारा इस पाठ्यक्रम को मान्यता प्रदान की गई है। चार सेमेस्टिर्स एम.पी.एड. स्नातकोत्तर उपाधि पाठ्यक्रम भी राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त है।

1.6 संस्थान द्वारा शैक्षणिक सत्र 2009-10 में भारत सरकार के अनुमोदन उपरांत गुवाहाटी में उत्तर-पूर्वी केन्द्रा की स्थाटपना की गई। वर्तमान में केन्द्रे द्वारा बी.पी.एड. पाठ्यक्रम का संचालन किया जा रहा है।

1.7 संस्थान को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एन.ए.ए.सी.) द्वारा प्रत्यायित किया गया है।

1.8 संस्थान को एकीकृत प्रबंधन प्रणाली (आई.एम.एस.) के तहत आई.एस.ओ. 9001 (गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली) आई.एस.ओ. 14001 (पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली) एवं ओ.एच.ए.एस. 18001 (व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रणाली) के मापदंडों पर प्रमाणित किया गया है।

2 परिसर

2.1 लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान परिसर शक्तिनगर, रेसकोर्स रोड पर स्थित है एवं ग्वालियर रेलवे स्टेशन से लगभग 01 कि.मी. की दूरी पर है। ग्वालियर आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर नई दिल्ली से करीब 320 कि.मी. की दूरी पर उत्तर-दक्षिण मुख्य रेलमार्ग पर स्थित है।

2.2 संस्थान परिसर का संपूर्ण क्षेत्रफल 153 एकड़ होकर पूर्णतः आवासीय है। संस्थान परिसर में अध्यापन कक्ष, प्रयोगशालाएं, शोध खंड, सभागार और प्रशासनिक खंड शामिल है। संस्थान में कर्मचारियों, छात्रों, शोधकर्ताओं एवं अन्य लोगों के उपयोग हेतु अनूठा पुस्तकालय है, जिसमें समस्त आधुनिक सुविधायें उपलब्धग हैं। संस्थान के परिसर में सात पुरुष छात्रावास, चार महिला छात्रावास, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग भोजनालय, स्वामस्य्सब केन्द्रा, तरणताल, ओलंपिक के आकार का बड़ा तरणताल, आंतरिक क्रिकेट पिच, दो आंतरिक जिम्नेजियम भवन, जुडो, टेबल-टेनिस, भारोत्तोलन व भारवहन के लिए आंतरिक कक्ष, एक स्क्वाश रैकेट आंतरिक कक्ष, सिंथैटिक (कृत्रिम) हॉकी फील्ड , सिंथैटिक ट्रैक (निर्माणाधीन), वातानुकूलित सभागार और बैडमिंटन, बास्केटबॉल एवं वॉलीबॉल हेतु अद्भुत मल्टीपरपज़ हॉल है जिसके साथ एक रॉक-क्लाैइबिंग हेतु दीवार भी है। संस्थान के परिसर में सुव्यवस्थित खेल के मैदानों का निर्माण भी किया गया है। पुस्तकालय में व्यवसायिक एवं साहित्य से संबंधित पर्याप्त पुस्तकें उपलब्ध हैं, साथ ही यहाँ व्यवसायिक एवं अनुसंधान संबंधी दैनिक पत्र/पत्रिकाएँ/पत्र साहित्य भी उपलब्ध कराए जाते हैं। इस प्रकार यह निस्संदेह भारतवर्ष का सर्वश्रेष्ठ पुस्तकालय है। संस्थान की प्रयोगशालाएं अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित हैं, जो कि शोधार्थियों की समस्त शैक्षणिक आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। संस्थाशन द्वारा भारत में सेवारत शिक्षकों के लिए ओरिएंटेशन और रिफ्रेशर पाठ्यक्रम का संचालन यू.जी.सी., ए.एस.सी. के माध्यइम से किया जाता है।

2.3 उपलब्ध विशेषज्ञताओं एवं सुविधाओं को दृष्टिगत रखते हुए, भारत सरकार के युवा एवं खेल मंत्रालय ने प्रवीण प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए संस्थान में राजीव गाँधी खेल अभियान (आर.जी.के.ए.) संसाधन केंद्र की स्थापना की है।

2.4 संस्थान के परिसर में सभी शिक्षकों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के रहने हेतु पर्याप्त संख्या में आवासीय भवन उपलब्ध है। संस्थारन परिसर में ही पूर्ण रूप से सुसज्जित अतिथि गृह, एक सुविधा केंद्र, एक ए.टी.एम. सुविधायुक्तग बैंक एवं एक डाकघर भी स्थित है।